बालोद |
जिला कांग्रेस कमेटी बालोद ने धान खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि धान खरीदी समाप्त होने में केवल 5 दिन शेष हैं, लेकिन आज भी जिले में 13 हजार से अधिक किसान धान बेचने से वंचित हैं। कई सोसायटियों में धान खरीदी की लिमिट एक ही टोकन पर रोक दी गई है, जबकि किसानों का सत्यापन पहले ही हो चुका है। इसके बावजूद दूसरा और तीसरा टोकन नहीं काटा जा रहा, जिससे किसान अपनी मेहनत की उपज बेच नहीं पा रहे हैं। कई केंद्रों में तो धान खरीदी पूरी तरह बंद कर दी गई है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि धान खरीदी के नाम पर कुछ कर्मचारी किसानों से पैसे की मांग कर रहे हैं। हाल ही में डौंडी ब्लॉक में ऐसे ही एक मामले में एक आरआई को निलंबित किया गया है। धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है और किसान लगातार परेशान हैं। जानकारी के अनुसार, भाजपा के नेता भी किसानों की परेशानी को लेकर कलेक्टर से मुलाकात कर चुके हैं और स्वयं यह मान रहे हैं कि किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है।
कांग्रेस ने गिरदावरी में भी भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कई किसानों का रकबा कम कर दिया गया है। लिमोरा, मुजगहन सहित अनेक गांवों में गलत गिरदावरी के कारण किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ किसान हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक रकबा समर्पण बालोद जिले में कराया गया है। एक लाख 20 हजार से अधिक किसानों से रकबा समर्पण करवाया गया, वह भी घर-घर जाकर दबाव बनाकर। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि किसानों को चोर साबित कर रकबा समर्पण कराने के पीछे सरकार की मंशा क्या है।
इसके अलावा धान परिवहन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आधुनिक सिक्योरिटी और जीपीएस सिस्टम लगे होने के बावजूद कोड़िया धान खरीदी केंद्र से मल्लोरी संग्रहण केंद्र के लिए रवाना हुआ 900 बोरा धान से भरा ट्रक चार दिनों तक लापता रहा और बाद में बड़ूम के जंगल में लावारिस हालत में मिला।
जिला कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार से धान खरीदी व्यवस्था को तत्काल सुधारने, किसानों को उनका पूरा अधिकार दिलाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

