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Balod Times

बायोगैस को CNG से जोड़ने की मोदी सरकार की पहल से सुधरेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण: राकेश यादव

बालोद टाइम्स 

बालोद। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जैविक कचरे एवं गोबर को उपयोगी संसाधन में बदलने के लिए शुरू की गई GOBARdhan योजना और Compressed Bio-Gas (CBG) को बढ़ावा देने की नीति देश में स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। संजारी बालोद के जनसेवक राकेश यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे गांवों की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को दोहरा लाभ मिलेगा।

‘कचरे से कंचन’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम

राकेश यादव ने बताया कि GOBARdhan योजना के तहत पशुओं के गोबर, कृषि अवशेष और रसोई के जैविक कचरे से बायोगैस, CBG और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जा रही है।

“यह योजना गांवों में केवल स्वच्छता ही नहीं ला रही, बल्कि ग्रामीण आबादी के लिए अपशिष्ट प्रबंधन को कमाई के एक मजबूत साधन में बदल रही है।”

— राकेश यादव, जनसेवक (संजारी बालोद)

चरणबद्ध तरीके से लागू होगा CBG Blending Obligation

केंद्र सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा की खपत बढ़ाने के लिए CNG और घरेलू PNG क्षेत्र में CBG को मिलाने (Blending) का लक्ष्य तय किया है:

वित्त वर्ष 2025-26: 1\% CBG Blending

वित्त वर्ष 2026-27: 3\% CBG Blending

वित्त वर्ष 2027-28: 4\% CBG Blending

वित्त वर्ष 2028-29 से: 5\% CBG Blending

इस नीति से आयातित ईंधन पर देश की निर्भरता कम होगी और कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

किसानों को मिलेगा दोहरा लाभ: ऊर्जा भी और जैविक खाद भी

CBG संयंत्रों की प्रक्रिया से निकलने वाली उप-उत्पादित जैविक खाद खेतों की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में बेहद मददगार है। सरकार इन उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है। इससे किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं

छत्तीसगढ़ जैसे कृषि और पशुधन प्रधान राज्य के संदर्भ में बात करते हुए राकेश यादव ने कहा कि यहाँ गोबर और कृषि अवशेष प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यदि इनका वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया जाए, तो राज्य में:

स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

किसानों की आय में वृद्धि होगी।

ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छता को एक साथ मजबूती मिलेगी।

उन्होंने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल “कचरे से कंचन” (Waste to Wealth) की सोच को साकार कर आत्मनिर्भर और स्वच्छ भारत के निर्माण का आधार बन रही है।

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