बालोद टाइम्स
बालोद। नगर पालिका परिषद बालोद के वार्ड क्रमांक 11 स्थित खसरा नंबर 614/70 (रकबा 0.0200 हेक्टेयर) पर बने टीन शेड निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) बालोद द्वारा टंडन लाल कांवरे और ललित कांवरे को 13 अक्टूबर 2026 को अंतिम नोटिस जारी कर 3 दिनों के भीतर कब्जा हटाने या संतोषजनक जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। इसके जवाब में टंडन लाल कावरे ने 14 अक्टूबर 2026 को नगरपालिका के नोटिस का बिंदुवार वैधानिक जवाब प्रस्तुत करते हुए कार्रवाई समाप्त करने की मांग की है।
नगरपालिका का पक्ष (CMO द्वारा जारी नोटिस का सारांश):
मामला: वार्ड नं. 11 स्थित खसरा नंबर 614/70 के कुछ हिस्से पर किए गए टीन शेड निर्माण को अवैध बताते हुए नोटिस जारी किया गया।
संदर्भ: आवेदक वेदव्यास देवांगन और उनकी माता श्रीमती नैनी बाई देवांगन द्वारा माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर रिट याचिका (WPC No. 5020 of 2026) में पारित आदेश (दिनांक 01.10.2026) के परिपालन का हवाला दिया गया।
चेतावनी: नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत 03 दिवस के भीतर संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं करने पर अवैध निर्माण हटाने और उसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होने की चेतावनी दी गई थी।

टंडन लाल कावरे का जवाब (कावरे परिवार का पक्ष):
1970 से काबिज होने का दावा: कावरे परिवार का कहना है कि वे संबंधित भूमि पर वर्ष 1970 से (जब बालोद ग्राम पंचायत हुआ करता था) काबिज हैं और टीन शेड का निर्माण उसी समय का है। नगरपालिका गठन के बाद से लगातार उनसे संपत्ति कर वसूला जा रहा है।


न्यायालयीन फैसलों का हवाला:
व्यवहार न्यायालय बालोद: व्यवहार वाद क्रमांक 32ए/2017 (निर्णय दिनांक 22.09.2025) की कंडिका 20 का उल्लेख करते हुए बताया कि राजस्व निरीक्षक की सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार वे वर्ष 1970 से उक्त स्थान पर घर-बाड़ी बनाकर काबिज हैं।
तहसीलदार बालोद का आदेश: राजस्व मामला क्रमांक 2025–26 (आदेश दिनांक 04.08.2026) में यह स्पष्ट कहा गया है कि 1970 से कब्जा होने के कारण उन्हें बेदखल नहीं किया जा सकता।
शिकायतकर्ता पर तथ्य छिपाने का आरोप: कावरे परिवार ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता वेदव्यास देवांगन ने पुलिस थाना बालोद में धारा 324(5) BNS के तहत दर्ज अपराध क्र. 343/2026 और तहसीलदार के आदेश की जानकारी उच्च न्यायालय एवं नगरपालिका से छिपाई है।
हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन का दावा: टंडन लाल कावरे का कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय ने 01.10.2026 के आदेश में सुनवाई का अवसर देकर नियमानुसार निर्णय लेने को कहा था, लेकिन नगरपालिका ने बिना सुनवाई का मौका दिए सीधे बेदखली/निर्माण हटाने का निर्देश जारी कर दिया, जो कि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों के खिलाफ है।
रिट अपील की तैयारी: कावरे परिवार ने बताया कि वे माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 01.10.2026 के विरुद्ध रिट अपील (Right Appeal) प्रस्तुत कर रहे हैं।

