बालोद। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) यज्ञदत्त शर्मा ने बुधवार लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं प्रशिक्षण केंद्र, दुगली (धमतरी, छत्तीसगढ़) का निरीक्षण किया। इस अवसर पर श्री शर्मा ने महिला समूह की दीदीयों से चर्चा भी की।
आय वृद्धि के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही गति;
जहां महिला समूह की सदस्यों ने उन्हें खरीदी, प्रसंस्करण तथा बिक्री प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी और उपाध्यक्ष श्री शर्मा ने सभी के उत्कृष्ट कार्य और मेहनत के लिए सभी की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि वनांचल में प्रचुरता से उपलब्ध स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण पर कार्य करें, जिससे आय में वृद्धि के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्राप्त होगी।
समूह की महिलाओं का किया उत्साहवर्धन;
जागृति बालिका स्व सहायता समूह एवं जय मां बम्लेश्वरी स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित किये जा रहे विभिन्न उत्पादों साबुन, जेल, कंडीशनर, आंवला, एलोवेरा जूस की प्रसंस्करण इकाई का निरीक्षण कर शर्मा ने समूह की महिलाओं का उत्साहवर्धन भी किया।
मूल्यवर्धन विष्णुदेव साय सरकार का मूल उद्देश्य;
इस दौरान यहां महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे उत्पादों के प्रसंस्करण का जायजा लेते हुए उन्होंने कहा कि मूल्यवर्धन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि, उपवास में फलाहार हेतु उपयोग किये जाने वाले तिखूर के निर्माण का कठिन परिश्रम एवं भावनात्मक लगाव देखा। ज्ञात रहे तिखूर बनाने की प्रक्रिया अत्याधिक जटिल है। कई बार इसे धोना पड़ता है।
स्व सहायता समूह की महिलाएं रही मौजूद;
भ्रमण के दौरान उपाध्यक्ष शर्मा ने वनोपज संघ द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी ली। इस अवसर पर बालोद जिला सहकारी संघ प्रतिनिधि विनोद कौशिक, समूह से अंबिका मंडावी, मंजूलता ध्रुव, रंभा टेकाम, भावना मरकाम, मिथिला नेताम, सुनीता वट्टी, किरण ध्रुव, मधु मरकाम, बिन्देसरी सलाम तथा सुपरवाइजर आयशा परवीन व प्रबंधक सुरेश साहू, रंजन कुलदीप सहित महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य मौजूद रहीं।
दुगली का केंद्र वनवासियों को बना रहा सशक्त;
गौरतलब हो कि, दुगली का यह केंद्र वनवासियों, खासकर महिला स्व-सहायता समूहों को लघु वनोपज (जैसे आंवला, तिखुर, शहद, जड़ी-बूटियां) के संग्रहण, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकिंग और विपणन का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाता है, जिससे उन्हें स्वरोजगार के अवसर मिलते हैं और उनकी आय बढ़ती है।
तिखुर का एकमात्र प्रसंस्करण केंद्र दुगली;
उपाध्यक्ष श्री शर्मा ने बताया, केंद्र में तिखुर का प्रसंस्करण भी किया जाता है, जिसका भारतीय संस्कृति और धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है, विशेषकर व्रत और उपवास के दौरान। यह मुख्य रूप से इसके पाक और औषधीय गुणों के कारण है, जो धार्मिक प्रथाओं के साथ अच्छी तरह से मेल खाते हैं।
ये उत्पाद हो रहे तैयार;
वनोपज से स्व-सहायता समूह बड़ी मात्रा में उत्पाद तैयार कर रहा है। आज बाजार में दुगली ब्रांड का शहद, आंवला, एलोवेरा, दोना-पत्तल, आवला कैंडी, बैचांदी, तीखुर उपलब्ध हैं। इन उत्पादों को प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई किया जाता है। प्रोडक्ट की गुणवत्ता को इस तरह मेंटेन किया गया है कि लोग दुगली आकर भी सामान खरीदते हैं।

