Balod Times

उपेक्षा का दंश झेल रहा उप केंद्र दरबारी नवागांव, अब तक नहीं बन पाया स्टाफ के लिए भवन, ना प्रसाधन की है सुविधा

छोटी सी गुमटी में हो रहा संचालन, फटे बारदानों से बनाया गया खुला प्रसाधन

 

बालोद। बालोद ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम दरबारी नवागांव में सांकरा ज सेवा सहकारी समिति के तहत धान खरीदी के लिए उप केंद्र बनाया गया है। विगत लगभग 6 सत्र से यहां उप केंद्र का संचालन किया जा रहा है। पर स्थिति यह है कि आज भी यहां समुचित सुविधाओं का अभाव देखने को मिल रहा है। सुविधाओं की कमी के बीच किसान धान बेचने को मजबूर है। तो समिति प्रबंधन भी कई तरह की परेशानियों से गुजर रहा है। 6 साल हो गए पर आज तक यहां प्रबंधन, अन्य स्टाफ के लिए सुरक्षित भवन नहीं बन पाया है। मजबूरी में संबंधित स्टाफ एक छोटी सी गुमटी में एक साथ चार जगह पर कुर्सी लगाकर बैठते हैं। जहां उन्हें काफी परेशानी महसूस होती है। तो ही गर्मी के दिनों में यह गुमटी काफी गर्म हो जाती है। पानी के लिए भी पर्याप्त सुविधा नहीं है। बगल के सरकारी स्कूल से पानी लाना पड़ता है। तो वही किसानों और प्रबंधन स्टाफ के लिए प्रसाधन तक की भी सुविधा यहां नसीब नहीं हो रही है। मजबूरी में एक दीवार के पास फटे हुए बारदानों से घेराबंदी कर अस्थाई बाथरूम/ प्रसाधन कक्ष बनाया गया है। शौचालय तो यहां है ही नहीं। इस अधूरी सुविधा धान बेचने आने वाले सभी किसानों सहित महिलाओं को बड़ी परेशानी होती है।

स्वतंत्र सेवा सहकारी समिति बनने के बाद सुधर सकते हैं हालात

प्रबंधन ने बताया कि 6 साल से भवन की कमी है तो वहीं प्रसाधन की सुविधा नहीं है। हम संबंधित विभाग से लगातार मांग कर रहें हैं तो वहीं वर्तमान में अब तक सांकरा ज समिति के तहत हमारा उप केंद्र संचालित हो रहा। पर हमें स्वतंत्र सेवा सहकारी समिति के लिए पंजीयन नंबर (299) शासन से प्राप्त हो चुका है। उम्मीद है आने वाले अप्रैल में विधिवत शासन से स्वीकृति मिलने के साथ स्वतंत्र सेवा समिति संचालित हो तब जाकर हमें मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। उप केंद्र के रूप में 6 साल से संचालन के बावजूद यहां का विकास नहीं हो पाया है। प्रबंधन सहित यहां धान बेचने आने वाले तीन गांव के किसानों को मूलभूत समस्याओं से रोजाना जूझना पड़ता है।

बफर लिमिट से कहीं ज्यादा हो चुकी है धान खरीदी, परिवहन समय पर नहीं हुआ तो एक हफ्ते बाद बंद करने की नौबत

 

समिति प्रबंधन ने बताया कि एक ओर जहां मूलभूत समस्याएं तो व्याप्त है ही, वर्तमान धान खरीदी सत्र के दौरान परिवहन की भी काफी समस्या यहां देखने को मिल रही है। परिवहन में कमी के चलते परिसर में धान खरीदने की जगह नहीं बची है। यहां बफर लिमिट 7200 क्विंटल है। पर उससे कहीं ज्यादा वर्तमान में धान यहां रखा हुआ है। अब तक कुल 23 हजार 370 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। जिसमें से मात्र 6040 क्विंटल धान का परिवहन हुआ है। 17330 क्विंटल धान के परिवहन का इंतजार है। जिससे प्रबंधन को धान की सूखत की समस्या और चूहों के द्वारा काफी नुकसान पहुंचने से घाटा उठाना पड़ रहा है। अगर परिवहन में तेजी नहीं आ पाई तो जगह की कमी के चलते मुश्किल से इसी हफ्ते तक की धान खरीदी चल पाएगी। प्रबंधन ने जल्द से जल्द धान परिवहन की मांग की है। ताकि बचत किसानों का ध्यान समय पर खरीदा जा सके। तो वही अभी आधे किसान भी धान नहीं बेच पाए हैं और समय मात्र 1 महीने है। ऐसे में धान खरीदी का समय बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है।

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