बालोद टाइम्स
बालोद। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देशानुसार, जगदलपुर NIA अदालत द्वारा झीरम घाटी हमले पर सुनाए गए हालिया फैसले और NIA की चार्जशीट की कमियों को लेकर आज राजीव भवन बालोद में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी बालोद के अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने कहा कि 25 मई 2013 को हुए इस खूनी नरसंहार में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित 29 लोग शहीद हुए थे। NIA कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्णय पीड़ितों और जनता के लिए “आधा-अधूरा न्याय” है। इस निर्णय से घटना के वास्तविक षड्यंत्रकारियों और राजनीतिक पहलुओं का खुलासा नहीं हो सका है। जिन निचले स्तर के नक्सलियों को दोषी ठहराया गया है, वे केवल राशन पहुंचाने या खाना बनाने वाले सदस्य थे, जबकि बड़े नक्सली नेताओं और मास्टरमाइंडों की भूमिका अब भी रहस्य बनी हुई है।
कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल:
सुरक्षा में चूक: परिवर्तन यात्रा के दौरान अचानक सुरक्षा बल क्यों हटाए गए और यात्रा का रूट किसके निर्देश पर बदला गया?
पूछताछ में ढिलाई: बाद में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से गहन पूछताछ क्यों नहीं की गई?
साक्षियों के बयान: घटना के चश्मदीदों और घायलों के बयानों को जांच में प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?
नाम हटाना: प्रारंभिक FIR में शामिल बड़े नक्सली नेताओं के नाम किन परिस्थितियों में चार्जशीट से हटाए गए?
प्रेसवार्ता में संजारी बालोद की विधायक एवं प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती संगीता सिन्हा ने तत्कालीन भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार शुरू से ही संदेह के घेरे में रही है और उसने जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया। यह केवल नक्सली हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और राजनीतिक विरोध की आवाज को कुचलने की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश थी।
कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे कांड की निष्पक्ष, व्यापक और सभी पहलुओं को शामिल करते हुए पुनर्गठन जांच कराई जाए ताकि शहीद नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिवारों को सच्चा न्याय मिल सके।
पत्रकारवार्ता में जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष कृष्णा दुबे, विधायक प्रतिनिधि कमलेश श्रीवास्तव, नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष कासिमुद्दीन कुरैशी, और युवा कांग्रेस नेता हिमांशु लावत्र विशेष रूप से उपस्थित रहे।


