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Balod Times

न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर आधी रात में दुकान ध्वस्त करने का आरोप, पीड़ित पक्ष ने की निष्पक्ष जांच की मांग

बालोद टाइम्स 

बालोद। राष्ट्रीय राजमार्ग-930 स्थित बालोद के गंजपारा में वर्षों पुरानी एक दुकान को आधी रात में जेसीबी चलाकर ध्वस्त करने का मामला गरमा गया है। इस कार्रवाई से न केवल पीड़ित परिवार की आजीविका पर संकट आ खड़ा हुआ है, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद विधिक प्रक्रिया का पालन किए बिना दुकान तोड़ी गई।

2017 के कोर्ट आदेश के उल्लंघन का आरोप

पीड़ित परिवार (टंडन लाल कावरे) द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, माननीय व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी), बालोद ने सिविल वाद क्रमांक A/32/2017 में स्पष्ट आदेश दिया था कि:

वादग्रस्त भूमि का कब्जा केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Due Process of Law) से ही प्राप्त किया जा सकता है।

कब्जा लेने से पूर्व संबंधित पक्ष को वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर उचित क्षतिपूर्ति देना अनिवार्य होगा, क्योंकि न्यायालय ने कब्जे को अवैध नहीं ठहराया था।

पीड़ितों का कहना है कि तहसीलदार बालोद के रिकॉर्ड में भी न्यायालय के आदेशों के पूर्ण पालन का अभाव दर्ज है। इसके बावजूद 09 जुलाई 2026 की रात 2:00 से 2:30 बजे के बीच जेसीबी और अन्य मशीनों से दुकान को अचानक तोड़ दिया गया।

1985 से चल रही थी दुकान, भारी नुकसान

पीड़ित पक्ष का दावा है कि यह दुकान वर्ष 1985 से उनके परिवार की जीविका का मुख्य आधार थी। अचानक हुई इस कार्रवाई से उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से गहरा आघात लगा है। उनका कहना है कि:

“यह सिर्फ एक दुकान गिराने का मामला नहीं है, बल्कि न्यायालय के सम्मान, कानून के शासन और आम नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।”

जांच की रफ्तार पर सवाल और प्रमुख मांगे

मामले की पुलिस शिकायत दर्ज कराने और दस्तावेज सौंपने के बाद भी पीड़ित परिवार ने जांच की गति पर असंतोष जताया है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

तत्काल गिरफ्तारी: घटना में शामिल दोषियों की जल्द पहचान कर FIR के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

साक्ष्यों की जब्ती: तोड़फोड़ में प्रयुक्त जेसीबी और अन्य वाहनों को जब्त किया जाए।

डिजिटल सबूत सुरक्षित हों: आसपास के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों को बिना देरी सुरक्षित किया जाए।

क्षतिपूर्ति: हुए आर्थिक नुकसान का निष्पक्ष मूल्यांकन कराकर मुआवजा दिया जाए।

पारदर्शी जांच: जांच किसी दबाव के बिना निष्पक्ष और समयबद्ध सीमा में पूरी की जाए।

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