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Balod Times

बालोद जिला पंचायत की सामान्य सभा में जमकर हंगामा: सामूहिक विवाह में गड़बड़ी और विकास कार्यों में उपेक्षा पर अधिकारियों की लगाई क्लास

                        बालोद टाइम्स 
बालोद | जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक इस बार विकास कार्यों की समीक्षा से ज्यादा हंगामे और तीखी बहस को लेकर सुर्खियों में रही। बैठक में सामूहिक विवाह योजना में कथित अनियमितताओं से लेकर स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा जैसे मुद्दों पर अधिकारियों को जमकर घेरा गया।
सबसे खास बात यह रही कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने में सिर्फ विपक्ष ही आगे नहीं था, बल्कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के रवैये पर कड़ा असंतोष जताया।

सामूहिक विवाह में फर्जीवाड़े के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
बैठक की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन विभागवार समीक्षा आगे बढ़ते ही माहौल गरमा गया। संजारी-बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने जिले में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं का मुद्दा बेहद प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने पहले से विवाहित जोड़ों का भी सामूहिक विवाह करा दिया। विधायक ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
इसके साथ ही बैठक में सरकारी स्कूलों की बदहाली, शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर स्कूल भवनों पर चिंता जताई गई। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिस पर शासन स्तर से तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।
“जिले में आयोजित सामूहिक विवाह योजना में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। पूर्व से विवाहित जोड़ों को भी इसमें शामिल किया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।”
— संगीता सिन्हा (विधायक, संजारी-बालोद)

जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और पारदर्शिता पर उठे सवाल
गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिले में आयोजित होने वाले शासकीय कार्यक्रमों और विकास कार्यों की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नहीं दी जाती।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई निर्माण कार्यों के लिए एजेंसियों का चयन भी जनप्रतिनिधियों को अंधेरे में रखकर किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो रही है। उन्होंने इन सभी मामलों की जांच की मांग की है।
“शासकीय कार्यक्रमों और विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की जा रही है। बिना विश्वास में लिए निर्माण एजेंसियां तय की जा रही हैं, जिससे कार्यों की पारदर्शिता पर असर पड़ रहा है।”
— कुंवर सिंह निषाद (विधायक, गुंडरदेही)

जिला पंचायत अध्यक्ष ने भी जताई नाराजगी, जांच समिति के गठन की मांग
बैठक का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तब सामने आया जब जिला पंचायत अध्यक्ष तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खुलकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत को स्वीकृत विकास कार्यों तक की जानकारी नहीं दी जाती और कई कार्य अधिकारियों के चहेतों के माध्यम से कराए जाने की शिकायतें मिल रही हैं।
अध्यक्ष ने स्थिति को देखते हुए निम्नलिखित प्रमुख प्रस्ताव रखे:
निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच के लिए जिला पंचायत सदस्यों की समिति का गठन किया जाए।
राज्य शासन और जिला खनिज न्यास (DMF) मद से होने वाले सभी निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा (RES) विभाग के माध्यम से कराए जाएं।
“स्वीकृत विकास कार्यों की जानकारी तक जिला पंचायत को नहीं दी जा रही है। पारदर्शी व्यवस्था के लिए निर्माण कार्यों की जांच हेतु सदस्यों की समिति बननी चाहिए।”
— तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर (अध्यक्ष, जिला पंचायत बालोद)

प्रशासन के रवैये पर बड़े सवाल
बालोद जिला पंचायत की इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर असंतोष अब केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहा। सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा भी अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
अब देखना यह होगा कि बैठक में उठे इन गंभीर आरोपों और जांच की मांगों पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।

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