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बालोद जिले के करहीभदर व आसपास के क्षेत्रों में पागल कुत्ते का आतंक, प्रशासन की सतर्कता और जनसावधानी बेहद जरूरी

बालोद। जिले के करहीभदर गांव और उसके आसपास के इलाकों में पिछले दो दिनों से पागल कुत्ते (रेबीज संक्रमित होने की आशंका) का आतंक देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक उग्र कुत्ते ने अलग-अलग स्थानों पर कई लोगों को काट लिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में भय और चिंता व्याप्त है, वहीं बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत महसूस की जा रही है। यह स्थिति न केवल जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या है, बल्कि प्रशासनिक त्वरित कार्रवाई की भी मांग करती है।

पालतू कुत्ता हो गया है पागल, सुरक्षा के लिहाज से कराई गई मुनादी, प्रशासन गंभीरता दिखाए

जानकारी अनुसार बालोद जिले के गुरूर ब्लॉक के ग्राम नारागांव के एक घर के पालतू कुत्ता जो कि पागल हो चुका है, दो दिन से घूम घूम कर दर्जनों लोगों को अपना शिकार बना चुका है। ग्राम नारागांव से लेकर बालोद ब्लाक के करहीभदर, कन्नेवाड़ा और आसपास के गांव में इस पागल कुत्ते की दहशत बनी हुई है। दूसरे दिन भी लोग इस बात से दहशत में हैं कि कहीं वापस वह कुत्ता बस्ती में ना आ जाए। जनपद सदस्य लोकेश डड़सेना ने बताया कि गुरुवार को उक्त पागल कुत्ते को करहीभदर के ईट भट्ठा के आसपास देखा गया है। गांव के 15 से 20 लोगों द्वारा काफी हिम्मत करके कुत्ते को गांव से बाहर भगाया गया है। इस बीच एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। जिसमें दिख रहा है कि किस तरह से पागल कुत्ता लोगों को घरों और दुकानों में घुसकर काटने के लिए दौड़ा रहा है। बच्चे और बूढ़े अपनी मुश्किल से जान बचा पा रहे हैं । बुधवार को एक ही दिन में 14 लोगों को काटने की घटना सामने आई थी। जिसमें पांच गंभीर लोगों को बालोद जिला अस्पताल से धमतरी भी रेफर किया गया है।जानकारी अनुसार उक्त पालतू कुत्ता नारागांव की नवल बाई के घर का है। जो कुछ दिनों तक बाहर घूम रहा थे फिर वापस घर आने पर अपने मालिक के ही बच्चे के ऊपर हमला किया। फिर उसके बाद गांव के अन्य लोगों को अपना शिकार बनाया और बुधवार को ग्राम सांकरा के सरपंच और एक महिला को अपना शिकार बनाया। एक महिला बस का इंतजार कर रही थी उस पर भी अचानक कुत्ते ने हमला कर दिया । जैसे तैसे गांव के ग्रामीणों ने उसे अस्पताल भेजवाया फिर उसके बाद कुत्ते को 15 से 20 लोग घेरते हुए दौड़ाया। फिर उसने रोड पर बैठे और लावारिस कुत्ते को काट लिया फिर कुत्ते ने एक घर में घुस गया जो एक बुजुर्ग पर हमला करने की कोशिश किए। फिर डंडे को अपने मुंह से काटने लगा। आसपास सभी गांव लोगों को मुनादी कर कुत्ते का हुलिया बताते हुए सचेत किया जा रहा है। कुत्ते का कलर लाल रंग का है और मुंह से झाग या लार निकल रहा है। करहीभदर, मुजगहन, सांकरा, हथौद सहित अन्य गांव में मुनादी करा दी गई है। जनपद सदस्य लोकेश डड़सेना ने शासन प्रशासन से मांग की है कि लावारिश कुत्ते की नसबंदी कराई जाए ताकि उनकी आबादी कम हो सके तो वही जो भी पालतू कुत्ते घर में रखे हुए उनको भी सख्त हिदायत दी जाए कि उनकी वजह से किसी दूसरे को नुकसान ना हो और लापरवाही बरतने वाले लोगों पर कार्रवाई भी की जाए।

 

कुत्ते के काटने से क्या होता है

कुत्ते के काटने से सबसे बड़ा खतरा रेबीज (जलातंक) नामक जानलेवा बीमारी का होता है।

रेबीज वायरस संक्रमित कुत्ते की लार के माध्यम से घाव के जरिए शरीर में प्रवेश करता है।

शुरुआती लक्षणों में घाव में जलन, दर्द, बुखार, सिरदर्द, बेचैनी और कमजोरी शामिल हो सकते हैं।

बाद की अवस्था में पानी से डर लगना, झटके आना, अत्यधिक उत्तेजना, भ्रम की स्थिति और अंततः मृत्यु तक हो सकती है।

एक बार रेबीज के लक्षण प्रकट हो जाने पर यह लगभग 100 प्रतिशत घातक बीमारी मानी जाती है, इसलिए समय पर इलाज अत्यंत आवश्यक है।

आम नागरिकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत कम से कम 10–15 मिनट तक साबुन और साफ पानी से धोना चाहिए।

बिना देरी किए नजदीकी शासकीय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना चाहिए।

झाड़-फूंक, घरेलू नुस्खों या अफवाहों पर बिल्कुल भरोसा न करें।

बच्चों को अकेले बाहर खेलने न भेजें और उन्हें आवारा या आक्रामक कुत्तों से दूर रखें।

जिस क्षेत्र में पागल कुत्ते की सूचना है, वहां अनावश्यक आवाजाही से बचें।

कुत्ते को पत्थर मारने या उकसाने से बचें, इससे वह और अधिक आक्रामक हो सकता है।

प्रशासन को क्या पहल करनी चाहिए

स्वास्थ्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम बनाकर तत्काल क्षेत्र का निरीक्षण किया जाए।

संदिग्ध पागल कुत्ते को सुरक्षित तरीके से पकड़कर अलग किया जाए या आवश्यक होने पर मानक प्रक्रिया के तहत निस्तारण किया जाए।

काटे गए सभी पीड़ितों की पहचान कर उनका तत्काल मेडिकल फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी, पोस्टर और प्रचार के माध्यम से लोगों को रेबीज के खतरे और सावधानियों के बारे में जागरूक किया जाए।

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी अभियान को तेज किया जाए।

स्थानीय प्रशासन, पंचायत और पुलिस के माध्यम से स्थिति पर सतत निगरानी रखी जाए।

जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी

करहीभदर और आसपास के क्षेत्रों में पागल कुत्ते की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति और गंभीर रूप ले सकती है। रेबीज जैसी घातक बीमारी के प्रति थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की सक्रियता और नागरिकों की सजगता ही इस खतरे से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है। यह आवश्यक है कि लोग भयभीत होने के बजाय जागरूक रहें, सही जानकारी अपनाएं और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें, ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते रोका जा सके और क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जा सके।

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