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​नारी शक्ति वंदन अधिनियम: “विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा फिर हुआ बेनकाब” — कुसुम शर्मा

भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर साधा निशाना; बताया विकास विरोधी

मुख्य बिंदु: विपक्ष की मानसिकता पर कड़ा प्रहार

​भाजपा मंडल अध्यक्ष कुसुम शर्मा ने सदन में प्रस्तुत ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ के विरोध को लेकर कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष को आड़े हाथों लिया है। उनके वक्तव्य के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

  • दोहरा चरित्र: कुसुम शर्मा ने कहा कि विपक्ष द्वारा इस बिल का विरोध करना उनके महिला विरोधी चरित्र को प्रमाणित करता है। कांग्रेस के लिए मातृशक्ति केवल एक ‘वोट बैंक’ है, जो उन्हें सिर्फ चुनाव के समय याद आती है।
  • विकास में बाधा: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि देश की आधी आबादी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे।
  • नेतृत्व क्षमता पर सवाल: शर्मा ने कहा कि विपक्षी दलों की सोच यह है कि महिलाओं में नेतृत्व करने की क्षमता नहीं होती, इसीलिए वे उन्हें केवल घर की चारदीवारी तक सीमित देखना चाहते हैं।

मोदी सरकार की प्रतिबद्धता

​कुसुम शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के विजन की सराहना करते हुए कहा:

    1. 33% आरक्षण: केंद्र सरकार का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करना है।
    2. सशक्तीकरण के 12 वर्ष: पिछले 12 वर्षों से केंद्र सरकार लगातार महिलाओं के उत्थान और विकास के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है।
    3. अग्रणी भूमिका: केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की सभी प्रमुख योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

​”देश की महिलाएं कांग्रेस और विपक्ष के इस अपमानजनक रवैये को कभी माफ नहीं करेंगी। आने वाले समय में नारी शक्ति ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।”

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