कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा और जनप्रतिनिधियों ने श्रमदान कर दिया संदेश, जिला प्रेस क्लब के ‘मटका-कोटना’ अभियान की हुई सराहना।
बालोद | राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे धनोरा (छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 14वीं वाहिनी) के समीप आज पर्यावरण संरक्षण का एक सुंदर दृश्य देखने को मिला। जिला प्रशासन एवं जिला प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में ‘नीर चेतना अभियान’ के अंतर्गत रोपे गए पौधों को जीवनदान देने हेतु श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मटका सिंचाई पद्धति से पौधों को नया जीवन
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मनरेगा के तहत रोपे गए 250 पौधों के समीप मटके लगाए गए। जिला प्रेस क्लब द्वारा इस पुनीत कार्य हेतु 150 मटके और 5 कोटना उपलब्ध कराए गए हैं। इस पद्धति से पौधों को बूंद-बूंद पानी मिलता रहेगा, जिससे भीषण गर्मी में भी उनकी उत्तरजीविता सुनिश्चित होगी।
मुख्य अतिथि व सहभागिता
कार्यक्रम में कलेक्टर के साथ जिला पंचायत CEO श्री सुनील चंद्रवंशी, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता संजय साहू, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती चंद्रिका गंजीर और जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री संतोष साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व पत्रकारों ने श्रमदान किया।
प्रमुख बिंदु एवं प्रतिक्रियाएं:
- कलेक्टर की सराहना: श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि मीडिया न केवल सूचनाओं का माध्यम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी उनकी सक्रियता प्रेरणादायी है। संयुक्त जिला कार्यालय से शुरू हुआ यह ‘मटका अभियान’ अब जन-आंदोलन बन रहा है।
- गौ-सेवक का योगदान: कार्यक्रम में गौ-सेवक श्री नरेन्द्र जोशी के कार्यों की भी प्रशंसा की गई, जिन्होंने जिले में अब तक 700 से अधिक कोटना (पशुओं के पानी पीने का पात्र) वितरित किए हैं।
- प्रेस क्लब का संकल्प: प्रेस क्लब अध्यक्ष संतोष साहू ने बताया कि कलेक्टर की पर्यावरण के प्रति सजगता से प्रेरित होकर क्लब ने इस जिम्मेदारी को उठाया है और भविष्य में भी जनहित के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
उपस्थित गणमान्य
इस अवसर पर एसडीएम श्री आरके सोनकर, जनपद CEO श्री उमेश रात्रे, वरिष्ठ पत्रकार रवि भूतड़ा, लक्की अरोरा, संजय दुबे, अरुण उपाध्याय, नरेश श्रीवास्तव सहित भारी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। ग्राम सरपंच श्रीमती सुमन साहू ने अंत में आभार व्यक्त किया।
प्रभाव: इस पहल से न केवल पौधों को पानी मिलेगा, बल्कि मटकों और कोटना के माध्यम से राहगीर पक्षियों और मवेशियों के लिए भी पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

