टूटे झूले, जर्जर फिसलपट्टी और सूनी पड़ी हरियाली, नगर पालिका की अनदेखी पर उठे सवाल
बालोद। बालोद शहर का गौरव माने जाने वाला संजारी क्लब गार्डन आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। एक समय यह गार्डन ‘पिंक गार्डन’ के नाम से प्रसिद्ध था, जहां महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से सुरक्षित एवं मनोरंजक वातावरण उपलब्ध कराया गया था। लेकिन आज यही गार्डन अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है।
जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब पसरा है सन्नाटा
कभी बच्चों की चहलकदमी और महिलाओं की उपस्थिति से गुलजार रहने वाला यह गार्डन अब वीरान हो चुका है। गार्डन में लगे अधिकांश झूले टूट चुके हैं, फिसलपट्टी खराब हो गई है और कई स्थानों पर रखरखाव के अभाव में संरचनाएं जर्जर हो चुकी हैं। ऐसे में यहां आने वाले लोगों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
संजारी क्लब की पहचान पर लग रहा ग्रहण
संजारी क्लब केवल एक गार्डन नहीं, बल्कि बालोद विधानसभा क्षेत्र की पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। वर्षों तक यह परिवारों के मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह पहचान धीरे-धीरे गुमनामी में खोती जा रही है।
नगर पालिका की उदासीनता पर लोगों में नाराजगी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गार्डन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन का इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं है। नियमित मरम्मत, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में यह सार्वजनिक स्थल अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पुनर्जीवन की मांग
शहरवासियों ने नगर पालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संजारी क्लब गार्डन के पुनर्विकास की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार कार्य नहीं किए गए तो शहर की एक महत्वपूर्ण पहचान पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर पालिका इस ऐतिहासिक और लोकप्रिय गार्डन को फिर से उसकी पुरानी पहचान दिला पाएगी, या फिर यह बदहाली की भेंट चढ़कर इतिहास बन जाएगा?


