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Balod Times

बरसात में 60 परिवारों की जिंदगी दांव पर: रास्ते के अभाव में एंबुलेंस तक पहुंचना मुश्किल, ग्रामीणों ने लगाई गुहार

बालोद टाइम्स

बालोद/गुंडरदेही। विकासखंड गुंडरदेही के ग्राम पंचायत मोंगरी (मोहल्ला भाटापारा) में बरसात का मौसम लगभग 60 परिवारों के लिए आफत बनकर आया है। सुरक्षित रास्ते के अभाव में गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की जान हर वक्त खतरे में बनी रहती है। समस्या से तंग आकर ग्रामीणों ने कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ (BDO), दक्षिण पूर्व रेलवे (रायपुर मंडल) के DRM और जल संसाधन विभाग (WRD) को संयुक्त आवेदन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जानलेवा बने आवागमन के दोनों रास्ते

भाटापारा मोहल्ले के लगभग 55 से 60 परिवारों के पास मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए केवल दो ही विकल्प हैं और बारिश के दिनों में दोनों ही खतरनाक हो जाते हैं:

रेलवे पुलिया का रास्ता: पहला रास्ता रेलवे लाइन के नीचे बनी पुलिया से गुजरता है। बारिश में तेज बहाव के कारण पुलिया के दोनों तरफ की मिट्टी-पत्थर बह जाते हैं, जिससे मार्ग पूरी तरह ठप हो जाता है। कई दोपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले लोग पानी के तेज बहाव में गिर चुके हैं।

WRD नाली का किनारा: दूसरा रास्ता जल संसाधन विभाग की नाली के किनारे से है, जहाँ ग्रामीणों ने खुद मुरुम डालकर कच्चा रास्ता बनाया था। बारिश में यह पूरा रास्ता दलदल और कीचड़ में बदल जाता है, जिससे गाड़ियों के फिसलने का हर वक्त डर बना रहता है।

‘1 घंटे’ की देरी बन सकती है मौत की वजह

ग्रामीणों ने अपनी भावुक अपील में बताया कि यदि किसी गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना हो या कोई अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, तो मुख्य सड़क तक पहुंचने में ही 1 घंटे से अधिक का समय लग जाता है। एंबुलेंस या इमरजेंसी वाहन का मोहल्ले तक पहुंचना नामुमकिन है। इसके अलावा बारिश में जहरीले सांप-बिच्छू का खतरा और बच्चों-शिक्षकों का स्कूल न पहुंच पाना आम बात हो गई है।

ग्रामीणों की प्रशासन से 3 प्रमुख मांगें:

रेलवे विभाग से: पुलिया के दोनों ओर स्थायी सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) और स्लैब का निर्माण किया जाए।

WRD विभाग से: नाली के किनारे 4 फीट चौड़ा पक्का रास्ता और क्रॉसिंग के लिए स्लैब निर्माण की अनुमति दी जाए।

जिला प्रशासन से: मनरेगा या आपदा प्रबंधन मद से तत्काल प्रभाव से अस्थायी सुरक्षित रास्ता बनाया जाए।

ग्रामीणों की गुहार: “हम नहीं चाहते कि सिर्फ एक रास्ते के अभाव में किसी मासूम, बुजुर्ग या गर्भवती महिला की जान चली जाए। प्रशासन हमारी पीड़ा समझे और जल्द कदम उठाए।”

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