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Balod Times

बालोद में ‘हुक्का-पानी’ बंद: अलग पंचायत की मांग पर आश्रित गांव कसही का आर्थिक बहिष्कार, बच्चों की कॉपी-किताब तक रोकी

बालोद टाइम्स 

बालोद। इक्कीसवींसदी के डिजिटल दौर में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से सामाजिक और आर्थिक नाकेबंदी का एक खौफनाक मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत टटेंगा और उसके आश्रित गांव कसही के बीच विवाद इतना गहरा गया है कि टटेंगा के दबंगों ने बाकायदा गांव में मुनादी पिटवाकर कसही के ग्रामीणों का संपूर्ण सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) कर दिया है।

अमानवीयता की हद यह है कि राशन, गैस सिलेंडर और मजदूरी तो दूर, टटेंगा के व्यापारी कसही के मासूम बच्चों को पढ़ने के लिए कॉपी-किताब तक नहीं दे रहे हैं।

विवाद की वजह: अलग पंचायत बनाने की मांग

ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरे विवाद की नींव पंचायत चुनाव के दौरान पड़ी थी। कसही गांव के लोग लंबे समय से अपने गांव को टटेंगा से अलग कर एक स्वतंत्र पंचायत बनाने की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का रुख अपनाया था। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर टटेंगा के कुछ रसूखदारों ने कसही के ग्रामीणों को सबक सिखाने की नीयत से यह सख्त फरमान जारी कर दिया।

गांव में अघोषित नाकेबंदी, सांस लेना भी दूभर

टटेंगा में जारी फरमान के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है:

रोजगार पर रोक: कसही के मजदूरों का टटेंगा में काम करना पूरी तरह बंद करा दिया गया है।

दुकानों पर पाबंदी: टटेंगा के किराना और खाद-बीज व्यापारियों को हिदायत दी गई है कि वे कसही के किसी भी व्यक्ति को सामान न बेचें। आदेश का उल्लंघन करने पर भारी सजा भुगतने की चेतावनी दी गई है।

मासूमों पर प्रताड़ना: पढ़ाई या कोचिंग के लिए टटेंगा जाने वाले कसही के बच्चों के रास्ते रोके जा रहे हैं और उन्हें स्टेशनरी का सामान तक देने से मना किया जा रहा है।

परंपरागत सेवाएं ठप: क्षेत्र में सदियों से चली आ रही ‘पौनी-पसारी’ व्यवस्था को भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

न्याय की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण

इस प्रताड़ना और अघोषित नाकेबंदी से तंग आकर कसही गांव के सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित आवेदन देकर टटेंगा के दबंगों—गैंदलाल देवांगन, कालीचरण सिन्हा, गोरेलाल सिन्हा, मूलचंद साहू, गब्बर सेन और गोपी रजक के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप कर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो दोनों गांवों के बीच का तनाव किसी बड़े हादसे या हिंसक झड़प में बदल सकता है।

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