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बालोद सब्जी मंडी का हाल बेहाल : जहां लगती है गाड़ियां, वहां फैला है कचरा, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान, देखे विडिओ

बालोद। बालोद जिला मुख्यालय के बुधवारी बाजार में संचालित सब्जी मंडी का इन दिनों हाल बेहाल नजर आ रहा है। प्रमुख समस्या यहां व्याप्त गंदगी की है। जिससे यहां के व्यापारियों सहित आने वाले ग्राहकों को प्रतिदिन दुर्गंध और अन्य परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। सब्जी मंडी से जुड़े व्यापारियों ने बताया कि स्थानीय नगर पालिका प्रशासन सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है। तो वही बड़ी लापरवाही यह भी है कि बाकी दिनों में जो भी आसपास बाजार में पसरा लगाते हैं उनके द्वारा गंदगी को सब्जी मंडी के आसपास फेंक दिया जाता है। ऊपर से मवेशियों का भी जमावड़ा रहता है। इससे सब्जी मंडी के संचालन में भी दिक्कतें आ रही है। जब सब्जियों को नीलामी के लिए रखा जाता है तो फिर मवेशियों का झुण्ड उन्हें खाने के लिए आसपास ताकते इकट्ठा हो जाती हैं। तो वही दुर्गंध भी फैलते रहता है। इससे सब्जी मंडी संचालन के साथ-साथ कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। रोजाना सुबह मंडी में सब्जियों की खरीदी बिक्री का दौर चलता है जहां खरीदारी के लिए बालोद ही नहीं आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से भी छोटे व्यापारी आते हैं। पर गंदगी को देख उन्हें परेशानी होती है तो वही सब्जी मंडी में जगह की भी कमी पड़ जाती है। गाड़ी लगाने के लिए जहां जगह आरक्षित या सुरक्षित होना चाहिए उक्त जगह पर मवेशियों का जमावड़ा और कचरा फैला हुआ है। व्यापारियों ने बताया कि नगर पालिका प्रशासन को इसके पहले भी समस्या से अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर का प्रमुख हृदय स्थल बुधवारी बाजार इस तरह से उपेक्षा का शिकार हो रहा है। सब्जी मंडी के व्यापारियों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग किया है कि जल्द से जल्द इस समस्या से निजात दिलाई जाए। ताकि हम बिना किसी बाधा के सब्जी मंडी का संचालन कर सके और गाड़ी लोडिंग अनलोडिंग के लिए स्थान सुरक्षित रह सके तो वहीं अन्य व्यापारियों और दुकानदारों को इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए कि उनकी वजह से किसी अन्य व्यापारियों को परेशानी ना हो। वे निश्चित स्थान पर कचरा डरे ना कि मंडी संचालन के जगह पर सभी को मिल जुल कर कारोबार करना है। पर किसी की लापरवाही का कामयाजा किसी और को भुगतना पड़ रहा है। ऊपर से नगर पालिका प्रशासन सफाई व्यवस्था को लेकर अनदेखी कर रहा है। तो बड़ी समस्या आसपास बैठने वाले मवेशियों की कारण भी है। संबंधित पशुपालक उन्हें सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं तो वहीं प्रशासन भी इनके लिए अब तक व्यवस्थित और वैकल्पिक इंतजाम नहीं कर पाया है। गौठान योजना शहर में फेल नजर आ रही है।

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