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Balod Times

वर्ल्ड रिकॉर्ड: छत्तीसगढ़ के शिक्षकों की अनूठी पहल, दृष्टिबाधित बच्चों के लिए बनाए 11 हजार से अधिक ऑडियो पाठ

बालोद टाइम्स 

राज्यपाल रमेन डेका ने टीम के सदस्यों को सहभागिता प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित

‘वर्ल्ड ऑडियो बुक बाई के शारदा’ डिजिटल प्लेटफॉर्म से कक्षा 5वीं से 12वीं तक की पढ़ाई हुई आसान

रायपुर/बालोद।

समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और दृष्टिबाधित (विजुअली इम्पेयर्ड) विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई को सहज बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने एक मिसाल कायम की है। प्रदेश के करीब 30 शिक्षकों की टीम ने मिलकर ‘वर्ल्ड ऑडियो बुक बाई के शारदा’ नाम से एक यूट्यूब आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए कक्षा 5वीं से 12वीं तक की एनसीईआरटी (NCERT) और छत्तीसगढ़ बोर्ड की किताबों के पाठों को ऑडियो फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जा रहा है।

शिक्षकों के इस नवाचार के तहत अब तक 11 हजार से अधिक ऑडियो कंटेंट अपलोड किए जा चुके हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया है।

राज्यपाल ने की सराहना, प्रदान किए प्रमाण पत्र

राज्यपाल श्री रमेन डेका के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से इस पहल का निरंतर विस्तार हो रहा है। राज्यपाल ने राजभवन में ‘वर्ल्ड ऑडियो बुक बाई के शारदा’ टीम के सदस्यों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए। साथ ही, इस अभियान का नेतृत्व कर रहीं के. शारदा को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा और पूरी टीम के प्रयासों की जमकर सराहना की।

बालोद की शिक्षिका ममता सोनेश्वर का भी अहम योगदान

इस राज्य स्तरीय अभियान में बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक स्थित ग्राम कंजेली प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका श्रीमती ममता सोनेश्वर ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

200+ ऑडियो कंटेंट: श्रीमती सोनेश्वर ने कक्षा 9वीं के संस्कृत और कक्षा 12वीं के इतिहास विषय के सभी पाठों को मिलाकर 200 से अधिक ऑडियो पाठ तैयार किए।

बहुउपयोगी पहल: उन्होंने बताया कि यह सामग्री न केवल दृष्टिबाधित बच्चों के लिए वरदान है, बल्कि पत्राचार (डिस्टेंस लर्निंग) से पढ़ने वाले और नियमित विद्यार्थियों के लिए भी पुनरावृत्ति (रिवीजन) व अभ्यास में बेहद मददगार साबित हो रही है।

समावेशी शिक्षा का प्रेरक उदाहरण

के. शारदा के नेतृत्व में तैयार यह डिजिटल प्लेटफॉर्म तकनीक, शिक्षकीय समर्पण और समावेशी शिक्षा के संगम की एक बेहतरीन नजीर बनकर उभरा है, जिससे दूर-दराज के इलाकों में बैठे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच रही है।

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