बालोद। डौंडी लोहारा ब्लॉक के ग्राम तूएगोंदी में वर्ष 2022 में हुई हिंसक घटना का मामला एक बार फिर गरमा गया है। शासन द्वारा इस प्रकरण को राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा बताते हुए केस वापसी के संबंध में कलेक्टर को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है।

इसी के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर बालोद कलेक्टोरेट पहुंचे और केस वापस नहीं लेने की मांग करते हुए धरना दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि वे सुबह 4 बजे अपने गांव से निकले और लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर कलेक्टोरेट पहुंचे। करीब 80 ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे, इस आंदोलन में शामिल हुए। हालांकि कलेक्टर के दौरे पर होने के कारण उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। अधिकारियों द्वारा समझाइश दिए जाने के बावजूद ग्रामीण शाम तक अपनी मांगों पर अड़े रहे।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि वर्ष 2022 में पाटेश्वर धाम में पारंपरिक पूजा के दौरान विवाद हुआ था, जिसके बाद बाहरी लोगों द्वारा कथित रूप से हमला किया गया। इस घटना में कई ग्रामीण घायल हुए थे। मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया गया था और प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में केस वापसी स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह केवल कानूनी मामला नहीं, बल्कि उनके सम्मान और न्याय की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केस वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष सुनवाई और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।

