बालोद। देशभर में जहां संसद से लेकर सड़कों तक नारी वंदन अधिनियम और महिलाओं को आरक्षण देने की चर्चा गूंज रही है, वहीं बालोद जिला पंचायत में हुई एक घटना ने पूरे जिले की राजनीति में भूचाल ला दिया है। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों के बैठने और जिला पंचायत के सभाकक्ष में सरपंच संघ की बैठक आयोजित होने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना से नाराज जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने तीखे तेवर अपनाते हुए इसे लोकतंत्र, महिला सम्मान और संवैधानिक व्यवस्था का खुला अपमान बताया है। उन्होंने साफ कहा कि यह घटना बेहद गंभीर है और दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दरअसल सोमवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में जिला सरपंच संघ बालोद की आवश्यक बैठक रखी गई थी। जिसमें सरपंचों की विभिन्न समस्याओं और शासन की योजनाओं के अलावा विभिन्न मुद्दों को लेकर विचार विमर्श में साथ चर्चा हुई। अब इस बैठक की अनुमति किसने और क्यों दी ये एक बड़ा सवाल है..?
अध्यक्ष बोलीं: महिला सम्मान पर चोट, नियमों की उड़ाई धज्जियां-
जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने कहा कि एक तरफ देश में महिलाओं को अधिकार और प्रतिनिधित्व देने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ बालोद में निर्वाचित महिला अध्यक्ष की कुर्सी पर ऐसे लोग बैठ रहे हैं, जो किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं। यह सिर्फ नियम विरुद्ध नहीं, बल्कि महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सीईओ की कुर्सियों पर बैठना किसी आम व्यक्ति या गैर संवैधानिक संस्था के पदाधिकारियों का अधिकार नहीं है। यह संस्थागत गरिमा का सवाल है।
तारणी चंद्राकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो भी लोग उनकी, उपाध्यक्ष और सीईओ की कुर्सी पर बैठे हैं, उन पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने जिला पंचायत सभाकक्ष में इस गैर संवैधानिक संस्था की बैठक होने दी, उन पर भी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत पंचायत मंत्री, संभागायुक्त और कलेक्टर से की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।
भाजपा जिलाध्यक्ष भी भड़के, बोले: लोकतांत्रिक संस्था का अपमान-
मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जिला पंचायत सभाकक्ष में सरपंच संघ की बैठक को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि जिला पंचायत जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैठक आयोजित कराने वालों और इसकी अनुमति देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आगे कोई भी ऐसी दुस्साहसिक हरकत न कर सके।
जिले की राजनीति में गरमाया माहौल-
घटना सामने आने के बाद जिला पंचायत परिसर से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। महिला नेतृत्व, संवैधानिक पदों की गरिमा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर यह मामला अब तूल पकड़ चुका है। अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि आखिर इस ‘कुर्सी कांड’ पर क्या कार्रवाई होती है और दोषियों पर कब तक गाज गिरती है।

