रायपुर/बालोद: विश्व रक्तदाता दिवस के शुभ अवसर पर राजभवन रायपुर में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में बालोद के सुप्रसिद्ध समाजसेवी और रक्तवीर दिलीप कौशिक को सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री रमन डेका जी और रेड क्रॉस सोसाइटी के प्रदेश चेयरमैन श्री तोमन साहू जी के हाथों प्रदान किया गया। दिलीप कौशिक को यह सम्मान उनके द्वारा किए गए नि:स्वार्थ रक्तदान, अंगदान-नेत्रदान के संकल्प और उनके संगठन द्वारा हजारों लोगों की जान बचाने के उत्कृष्ट मानवीय प्रयासों के लिए दिया गया है।
38 से अधिक बार रक्तदान और ‘भगत सिंह रक्तवीर परिवार’ की मुहिम
बालोद के वार्ड क्रमांक 9 कुर्मीपारा निवासी और ‘बाबू हेयर कट’ सैलून के संचालक दिलीप कौशिक बीते कई वर्षों से लगातार रक्तदान कर रहे हैं। वे स्वयं अब तक 38 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। दिलीप कौशिक बताते हैं कि उनके इस सफर की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई थी, जब उनके दोस्त की बहन सिकलिन बीमारी से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती थी। अस्पताल में खून की कमी को देखते हुए उन्होंने पहली बार रक्तदान किया और उस बच्ची की जान बचाई।
इस घटना से प्रेरित होकर उन्होंने युवाओं को जोड़ने के लिए ‘भगत सिंह रक्तवीर परिवार’ नाम से एक ग्रुप बनाया। आज इस ग्रुप में बालोद, कांकेर, धमतरी, दुर्ग और राजनांदगांव जिले के 222 से अधिक सक्रिय रक्तवीर जुड़ चुके हैं।
ग्रुप के माध्यम से 1,800 से अधिक लोगों को मिला जीवनदान
दिलीप कौशिक और उनके ग्रुप के साथियों की सक्रियता ऐसी है कि जैसे ही किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है, लोग ग्रुप में नाम, ब्लड ग्रुप और लोकेशन साझा करते हैं। इसके तुरंत बाद नजदीकी रक्तवीर अस्पताल पहुंचकर मदद करता है। इस मुहिम के जरिए अब तक 1,800 से अधिक जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर नया जीवन दिया जा चुका है। दिलीप कौशिक ने स्वयं बालोद के अलावा राजनांदगांव, धमतरी, दुर्ग और कई अन्य स्थानों पर जाकर संकट के समय लोगों की जान बचाई है।
अंगदान और नेत्रदान का भी लिया संकल्प
दिलीप कौशिक की सामाजिक जिम्मेदारी सिर्फ रक्तदान तक सीमित नहीं है। उन्होंने समाज के सामने एक और बड़ी मिसाल पेश करते हुए अपने जन्मदिन के अवसर पर देहदान (अंगदान) और नेत्रदान करने की भी घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में विधिवत फॉर्म भरकर जमा कर दिया है। उनका कहना है कि “जब मैं रक्तदान या समाज सेवा करता हूँ, तो मुझे आत्मिक सुकून मिलता है।”

