बालोद टाइम्स
बालोद: शहर का दिल और आम जनता के लिए सांस लेने की एकमात्र खुली जगह कहे जाने वाले ऐतिहासिक सरदार पटेल मैदान पर अब कंक्रीट और जालीदार तारों का ग्रहण लगने जा रहा है। प्रशासनिक अनदेखी और व्यावसायिक स्वार्थ के चलते मैदान में क्रिकेट बॉक्स (टर्फ) का निर्माण शुरू कर दिया गया है। मैदान के मूल स्वरूप को बिगाड़कर इसे व्यावसायिक रूप देने की पूरी पटकथा तैयार कर ली गई है।
मैदान पर खींची जा रही चूने की लकीरें किसी जनहित के विकास का संकेत नहीं, बल्कि शहर की इस साझी धरोहर को टुकड़ों में बांटने की पहली आहट हैं।
स्कूली बच्चों के भविष्य और अधिकारों पर सीधा प्रहार
सरदार पटेल मैदान से लगे हायर सेकेंडरी स्कूल और बुनियादी शाला के पास अपना कोई अलग से बड़ा खेल मैदान नहीं है। स्कूल के सैकड़ों बच्चे इसी मैदान में खुली हवा में खेलते-कूदते हैं और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी करते हैं।
अब मैदान के बीचों-बीच बंद जालीदार बॉक्स (पिंजरा) बनाकर इसके दायरे को समेटा जा रहा है, जिससे इन मासूम बच्चों के खेल अधिकारों और बचपन पर सीधा प्रहार हो रहा है।
“यह सिर्फ मैदान को छोटा करने की बात नहीं है, बल्कि शहर की खुली हवा और बच्चों के खेल के अधिकारों को कंक्रीट के नीचे दबाने की साजिश है।” — स्थानीय निवासी
उठते बड़े सवाल:
सरकारी मैदान पर व्यावसायिक कब्जा क्यों? सार्वजनिक संपत्ति पर इस तरह के बॉक्स क्रिकेट निर्माण को किसकी शह पर मंजूरी दी जा रही है?
बच्चों का खेल कहां होगा? जब पूरा मैदान ही कंक्रीट और जालियों में बदल जाएगा, तो आसपास के स्कूली बच्चे कहां जाएंगे?
प्रशासन की चुप्पी का राज क्या? स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों में भारी आक्रोश के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं?
स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों के अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरदार पटेल मैदान के प्राकृतिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ का यह खेल तुरंत नहीं रोका गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


