बैंक मैनेजर ने दी थी डराने की धमकी, लेकिन उपभोक्ता फोरम के आदेश पर मिला मुआवजा
महासमुंद।
एटीएम से मात्र 1000 रुपये कम निकलने के मामले में एक जागरूक उपभोक्ता की 12 साल लंबी कानूनी लड़ाई रंग लाई। आखिरकार बैंक को 4 लाख 36 हजार 787 रुपये का मुआवजा चुकाना पड़ा। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती और न्याय व्यवस्था पर भरोसे का उदाहरण बन गया है।
जानकारी के अनुसार, महासमुंद निवासी शिक्षक अजयम पटेल ने वर्ष 2010 में अपने खाते से एटीएम के माध्यम से 2000 रुपये निकालने का प्रयास किया था। मशीन से केवल 1000 रुपये ही निकले, जबकि खाते से पूरे 2000 रुपये कट गए। इस संबंध में जब उन्होंने संबंधित बैंक (पंजाब नेशनल बैंक) से शिकायत की, तो समाधान के बजाय उन्हें कथित रूप से धमकी दी गई कि शिकायत वापस न लेने पर उन्हें उलझाया जाएगा।
बैंक प्रबंधन द्वारा उचित कार्रवाई नहीं किए जाने पर अजयम पटेल ने जिला उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कराया। लंबी सुनवाई के बाद फोरम ने बैंक की लापरवाही मानते हुए आदेश दिया कि शिकायत के 7 दिनों के भीतर राशि वापस की जाए, अन्यथा प्रतिदिन 100 रुपये के हिसाब से जुर्माना अदा करना होगा।
बैंक द्वारा आदेश की अनदेखी किए जाने पर जुर्माने की राशि लगातार बढ़ती गई। वर्षों तक चले इस प्रकरण में ब्याज और दंड राशि मिलाकर कुल 4.36 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ा। इसके अलावा कानूनी खर्च और अन्य व्यय भी बैंक को वहन करना पड़ा।
यह मामला भारतीय रिजर्व बैंक के उन दिशा-निर्देशों से भी जुड़ा है, जिनमें स्पष्ट है कि एटीएम ट्रांजेक्शन फेल होने या कम राशि निकलने की शिकायत पर 7 कार्य दिवस के भीतर समाधान अनिवार्य है। निर्धारित समय में समाधान न होने पर बैंक को प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होता है।
क्या करें अगर आपके साथ भी ऐसा हो?
• एटीएम ट्रांजेक्शन में गड़बड़ी होने पर तुरंत संबंधित बैंक शाखा में लिखित शिकायत करें।
• शिकायत की रसीद या पावती अवश्य लें।
• 7 दिन में समाधान न मिलने पर बैंकिंग लोकपाल या जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराएं।
• सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
यह फैसला आम उपभोक्ताओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि यदि वे अपने अधिकारों के लिए डटकर खड़े रहें, तो न्याय अवश्य मिलता है।

