📍 इंदौर
इंदौर में सामने आए तथाकथित ‘करोड़पति भिखारी’ मांगीलाल के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के बाद प्रशासन द्वारा उन्हें भिखारी बताकर रेस्क्यू किए जाने पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब मांगीलाल के परिजन सामने आए हैं और उन्होंने प्रशासन के दावों को गलत और भ्रामक बताया है।
📸 गलतफहमी में वायरल हुईं तस्वीरें
परिजनों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें वायरल हुईं, उन्हें गलत संदर्भ में पेश किया गया। मांगीलाल शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं और पैरों में समस्या के कारण वे अक्सर पहियों वाले तख्ते पर बैठकर सर्राफा बाजार क्षेत्र में आते-जाते थे। इसी कारण लोगों ने उन्हें भिखारी समझ लिया और उनकी तस्वीरें वायरल कर दी गईं।
👨👩👦 परिजनों का दावा: “मांगीलाल भिखारी नहीं हैं”
मांगीलाल के भतीजे का कहना है कि जब वे आश्रय गृह में उनसे मिलने पहुंचे तो मांगीलाल ने साफ शब्दों में कहा कि वे भीख नहीं मांगते थे।
परिजनों के अनुसार, मांगीलाल सर्राफा बाजार में पैसों की वसूली या लेन-देन से जुड़े कार्यों के लिए जाते थे, न कि भीख मांगने के लिए।
🏢 प्रशासन की कार्रवाई कैसे हुई?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब इंदौर प्रशासन ने शहर को भिखारी-मुक्त बनाने के उद्देश्य से विशेष अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों की सूचना पर महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मांगीलाल को रेस्क्यू कर आश्रय गृह भेज दिया गया।
🏠 संपत्ति को लेकर भी विवाद
परिजनों ने प्रशासन द्वारा बताए जा रहे मांगीलाल की संपत्तियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। भतीजे के मुताबिक:
- जिस तीन मंजिला मकान को प्रशासन मांगीलाल का बता रहा है, वह उनकी मां के नाम दर्ज है।
- उस मकान पर लिया गया लोन भी चुकाया जा चुका है और सभी दस्तावेज मौजूद हैं।
- एक अन्य मकान को लेकर पारिवारिक विवाद अदालत में लंबित है।
परिजनों का कहना है कि बिना पूरी जांच के उन्हें ‘करोड़पति भिखारी’ बताना अन्यायपूर्ण है।
❓ अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
- क्या मांगीलाल को गलतफहमी में भिखारी समझ लिया गया?
- क्या वायरल तस्वीरों ने सच से पहले फैसला सुना दिया?
- क्या प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह सही और निष्पक्ष थी?
- क्या जांच के बिना किसी को ‘करोड़पति भिखारी’ कहना उचित है?
📰 निष्कर्ष
‘करोड़पति भिखारी’ का यह मामला अब केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया, सोशल मीडिया की भूमिका और मानवीय संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। परिजनों के दावों के बाद अब ज़रूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

