विश्व पर्यावरण दिवस पर हमर राज पार्टी ने विष्णु देव साय सरकार से की मांग; कहा- कॉर्पोरेट मित्रों को प्राकृतिक संपदा बेचने का हो रहा काम
रायपुर, 5 जून:
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य में मूल निवासियों के हितों के लिए संघर्षरत राजनीतिक दल ‘हमर राज पार्टी’ ने विष्णु देव साय सरकार से एक बड़ी मांग की है। पार्टी ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि छत्तीसगढ़ में अब किसी भी नई कोयला खदान और थर्मल पावर प्लांट की स्थापना को मंजूरी न दी जाए, और न ही पहले से चल रहे खदानों व प्लांटों के विस्तार की अनुमति दी जाए। पार्टी का कहना है कि कोयला उत्खनन और थर्मल पावर प्लांट के कारण छत्तीसगढ़ में पहले से ही भयंकर पर्यावरण असंतुलन की स्थिति बन चुकी है।
📊 छत्तीसगढ़ में कोयला और बिजली उत्पादन के चौंकाने वाले आंकड़े
हमर राज पार्टी के संरक्षक श्री अरविंद नेताम, अध्यक्ष श्री अकबर राम कोर्राम, महासचिव विनोद नागवंशी और प्रदेश अध्यक्ष श्री बी एस रावटे सहित अन्य नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर कुछ बेहद गंभीर आंकड़े सामने रखे हैं:
- देश में सर्वाधिक कोयला उत्खनन: छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 1800 लाख टन प्रति वर्ष कोयले का उत्खनन हो रहा है, जो देश में सबसे ज्यादा है। जबकि कुल कोयला भंडार के मामले में राज्य ओडिशा और झारखंड के बाद तीसरे नंबर पर आता है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में उत्खनन औसत से काफी अधिक है।
- 30,000 मेगावाट के पावर प्लांट: बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, सरगुजा, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग जिलों में लगभग 30,000 मेगावाट के कोयला आधारित बिजली संयंत्र चल रहे हैं।
- 500 लाख टन ‘राखड़’ की समस्या: इन प्लांटों में हर साल 1200 लाख टन कोयला जलता है, जिससे 500 लाख टन फ्लाई एश (राखड़) पैदा होती है। सड़क या ईंट बनाने में इसका बहुत छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाता है। बाकी राखड़ बांधों में भरी जा रही है, जो अक्सर टूटकर नदी-नालों को प्रदूषित कर रही है।
- जहरीली गैसें और बढ़ती गर्मी: इतनी बड़ी मात्रा में कोयला जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी विषैली गैसें पैदा हो रही हैं, जिससे राज्य में गर्मी और प्रदूषण का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
💧 पानी और सिंचाई संकट
नेताओं ने बताया कि इन 30,000 मेगावाट के पावर प्लांटों को चलाने के लिए प्रति वर्ष 12,000 लाख घन मीटर पानी की खपत हो रही है। यह पानी हसदेव बांगो बांध, महानदी के बराजों और गंगरेल आदि से दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय इलाकों की सिंचाई क्षमता पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
🌲 आदिवासियों का विस्थापन और वनों की कटाई
पार्टी ने रेखांकित किया कि लगभग सभी कोयला खदानें संविधान की अनुसूची 5 के अंतर्गत आने वाले आदिवासी इलाकों में हैं। हर नई खदान के लिए लाखों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं और हजारों आदिवासियों को विस्थापित होना पड़ रहा है, जिन्हें न तो उचित मुआवजा मिलता है और न ही रोजगार।
⚠️ सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी
हमर राज पार्टी के नेताओं ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया:
”भारतीय जनता पार्टी ने एक आदिवासी व्यक्ति को मुखौटे के रूप में मुख्यमंत्री पद पर बिठा दिया है, जबकि पर्दे के पीछे से इस पूरी प्राकृतिक संपदा को अपने कॉर्पोरेट मित्रों को बेचने का काम किया जा रहा है।”
संयुक्त बयान में राज्य और केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि इस विनाशकारी नीति को तुरंत नहीं रोका गया, तो हमर राज पार्टी सड़कों पर उतरकर इसके खिलाफ एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करेगी।

