बालोद टाइम्स
बालोद/रायपुर। छत्तीसगढ़ में बसों का किराया बढ़ने के बाद आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। बालोद जिले में यात्रियों को अब सफर के लिए पहले के मुकाबले ₹5 से ₹50 तक अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। हालांकि, किराया बढ़ाने के बावजूद बसों में मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है, जिससे यात्रियों में गहरा आक्रोश है।
प्रमुख मार्गों पर किराए में भारी बढ़ोतरी
14 अक्टूबर से नई दरों के लागू होने के साथ ही विभिन्न मार्गों के किराए में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है:
धमतरी से बालोद: पहले ₹60, अब ₹80 (₹20 की बढ़ोतरी)
राजनांदगांव से धमतरी: पहले ₹75, अब ₹100 (₹25 की बढ़ोतरी)
दुर्ग से बालोद: पहले ₹80, अब ₹110 (₹30 की बढ़ोतरी)

बढ़ा किराया, लेकिन सुविधाएं शून्य
किराया बढ़ने के बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि बस सेवाओं में सुधार होगा, लेकिन धरातल पर शिकायतें बरकरार हैं:
ओवरलोडिंग व अनफिट बसें: बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जा रही हैं, जिससे यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। कई अनफिट बसें भी सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रही हैं।
सुरक्षा व आरक्षित सीटों की उपेक्षा: महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
किराया सूची गायब: कई बसों में शासन द्वारा निर्धारित नई किराया सूची चस्पा नहीं की गई है, जिसके कारण किराए को लेकर यात्रियों और कंडक्टरों के बीच रोज़ाना विवाद व बहस की स्थिति बन रही है।
अधिवक्ताओं ने जताया विरोध, परिवहन संघ ने दी सफाई
मामले में जिला बस परिवहन संघ के उपाध्यक्ष डोमेन्द्र कुमार का कहना है कि शासन के आदेशानुसार 14 अक्टूबर से नई दरें लागू की गई हैं। उन्होंने दावा किया कि बसों में आगे और पीछे किराया सूची लगाई गई है तथा कंडक्टरों को यात्रियों के साथ विनम्रता से समझाइश देने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर, जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता धीरज उपाध्याय ने बढ़े हुए किराए पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे “आम जनता की जेब पर डाका” करार दिया है। उन्होंने कहा कि किराया तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं शून्य हैं और बसें सुरक्षा व परिवहन मापदंडों के विपरीत चलाई जा रही हैं।
परिवहन विभाग से जांच व कार्रवाई की मांग
स्थानीय यात्रियों एवं प्रबुद्ध जनों ने जिला परिवहन विभाग से मांग की है कि:
सभी बसों में दर सूची (Rate List) स्पष्ट रूप से चस्पा कराई जाए।
ओवरलोडिंग, अनफिट बसों और ओवरचार्जिंग पर नियमित जांच अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई हो।
महिला सुरक्षा और आरक्षित सीटों के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

