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Balod Times

आवास सूची को लेकर पंचायतों में बढ़ा विवाद: जांच में सामने आईं सर्वे त्रुटियां, दावा-आपत्ति का रास्ता खुला

जगन्नाथपुर में जिला पंचायत टीम पहुंची, पात्र हितग्राहियों से आवेदन करने की अपील

 

बालोद। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की पात्रता सूची को लेकर जिले की कई ग्राम पंचायतों में विवाद और असंतोष की स्थिति देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर लोगों ने पात्र होने के बावजूद नाम नहीं आने की शिकायत की, वहीं कुछ मामलों में एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम सूची में शामिल होने पर सवाल उठे।

इसी विषय को लेकर शिकायत के बाद जिला पंचायत की टीम जांच के लिए ग्राम जगन्नाथपुर पहुंची और ग्रामीणों से चर्चा कर जानकारी ली। बैठक में अधिकारियों द्वारा योजना से संबंधित कई महत्वपूर्ण बातें सामने रखी गईं।

ऑनलाइन सर्वे में गलत जानकारी और तकनीकी त्रुटियां बनी वजह

बैठक में बताया गया कि आवास प्लस एप के माध्यम से लोगों ने स्वयं या दूसरों की मदद से ऑनलाइन सर्वे फॉर्म भरे थे। इस दौरान कई मामलों में जानकारी भरते समय त्रुटियां हुईं, जिससे कुछ लोग पात्रता श्रेणी से बाहर हो गए।

कुछ मामलों में लोगों द्वारा संपत्ति, जमीन, वाहन, परिवार को पूर्व में मिला लाभ या अन्य जानकारी सही तरीके से दर्ज नहीं करने की भी बात सामने आई। इसके आधार पर पोर्टल के माध्यम से सूची तैयार हुई और पात्र–अपात्र का प्रारंभिक चयन किया गया।

सरपंच-सचिव को नहीं ठहराया गया जिम्मेदार

बैठक में स्पष्ट किया गया कि यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन सर्वे डेटा के आधार पर हुई है, इसलिए हर मामले में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका नहीं मानी जा सकती। कई ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों पर नाराजगी जताई, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि सूची अंतिम नहीं है और सुधार की प्रक्रिया उपलब्ध है।

दावा-आपत्ति का मिलेगा अवसर, सूची अंतिम नहीं

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान सूची अंतिम नहीं है। यदि किसी पात्र हितग्राही का नाम नहीं आया है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल हो गया है तो दावा-आपत्ति प्रस्तुत की जा सकती है।

यह आपत्ति व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से दी जा सकती है। ग्राम सभा के माध्यम से भी सूची में संशोधन की प्रक्रिया संभव है।

एक परिवार में कई नाम आने पर उठे सवाल

कई पंचायतों में यह शिकायत सामने आई कि एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम सूची में दिखाई दे रहे हैं या पूर्व में लाभ ले चुके परिवारों के नाम दोबारा शामिल हैं। ऐसे मामलों की जांच के लिए आवेदन देने की बात कही गई है।

जरूरतमंद को प्राथमिकता देने पर जोर

बैठक में यह भी बताया गया कि योजना का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक आवास पहुंचाना है। यदि किसी पात्र परिवार ने मजबूरी में कर्ज लेकर या जमीन बेचकर घर बना लिया है, तो वे भी आवेदन देकर अपनी स्थिति दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार प्राथमिकता निर्धारण के लिए निर्धारित मानकों के आधार पर आगे सूची का सत्यापन और संशोधन किया जाएगा।

ग्रामीणों से अपील की गई कि वे ग्राम सभा में सक्रिय भागीदारी करें, सूची की जानकारी लें और आवश्यकता होने पर समयसीमा के भीतर दावा-आपत्ति दर्ज कराएं, ताकि योजना का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंच सके।

 

इन 12 आधारों पर परिवार सूची से बाहर हो सकते हैं

आवास प्लस 2024 की एसओपी के अनुसार ग्राम सभा निम्न निष्कासन मापदंडों के आधार पर सत्यापन करेगी— जैसे पक्की छत या पक्की दीवार वाले मकान में रहने वाले परिवार, दो से अधिक कमरों वाले परिवार, मोटर चालित तीन या चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार, यंत्रीकृत कृषि उपकरण रखने वाले परिवार,
50 हजार या अधिक क्रेडिट सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड, परिवार में सरकारी कर्मचारी होना, पंजीकृत गैर-कृषि उद्यम होना,
परिवार के किसी सदस्य की मासिक आय 15 हजार रुपए से अधिक होना, आयकर दाता परिवार, प्रोफेशनल टैक्स देने वाले परिवार, 2.5 एकड़ या अधिक सिंचित भूमि, 5 एकड़ या अधिक असिंचित भूमि वाले शामिल हैं।
बैठक में यह भी सामने आया कि कई लोगों ने ऑनलाइन सर्वे भरते समय अनजाने में या गलत जानकारी देकर फॉर्म भर दिए। कुछ लोगों ने कमरों की संख्या, जमीन, वाहन या पूर्व में मिले लाभ की जानकारी सही नहीं भरी, जिससे पात्रता प्रभावित हुई।

 

जरूरतमंद को प्राथमिकता देने के लिए तय किए गए 12 मानक

बैठक में बताया गया कि केवल पात्र होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्राथमिकता सूची भी तय होगी। इसके लिए निम्न परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिनमें पहली बार लाभ पाने वाले परिवार,
दिव्यांग सदस्य वाले परिवार, परिवार में सक्षम वयस्क सदस्य नहीं होना, महिला मुखिया या विधवा परिवार, परिवार में कोई साक्षर वयस्क सदस्य नहीं होना,
आश्रयविहीन परिवार, निराश्रित परिवार, मैला ढोने वाले परिवार,
विशेष पिछड़े जनजातीय समूह,
मुक्त बंधुआ मजदूर, गंभीर बीमारी वाले सदस्य का परिवार, कम वार्षिक आय वाले परिवार शामिल हैं। वहीं यदि दो परिवार समान श्रेणी में आते हैं तो e-KYC के अनुसार आयु को टाई-ब्रेकर माना जाएगा।

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