बालोद टाइम्स
खिलाड़ियों के भविष्य के लिए दान की गई थी जमीन, आज रखरखाव के अभाव और गैर-खेल आयोजनों से खो रही पहचान
बालोद। आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय सरयू प्रसाद अग्रवाल की स्मृति में बना बालोद जिले का एकमात्र प्रमुख खेल मैदान—सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम—आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
विडंबना यह है कि जिस स्टेडियम के लिए अग्रवाल परिवार ने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नीव रखते हुए अपनी बहुमूल्य जमीन दान की थी, उसकी सुध अब केवल राष्ट्रीय पर्वों और बड़े सरकारी आयोजनों के समय ही ली जाती है। हर वर्ष की तरह इस बार भी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के मुख्य समारोह से पहले नगर पालिका प्रशासन स्टेडियम की साफ-सफाई, रंग-रोगन और साज-सज्जा में जुट गया है। लेकिन स्थानीय खिलाड़ियों और नागरिकों का यक्ष प्रश्न यही है—क्या राष्ट्रीय पर्व समाप्त होते ही यह स्टेडियम फिर से बदहाली के हवाले कर दिया जाएगा?

खिलाड़ियों के सपनों पर फिर रहा पानी
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. सरयू प्रसाद अग्रवाल और उनके परिवार ने खेलों के विकास और युवाओं के बेहतर भविष्य के उद्देश्य से यह भूमि दान की थी। उनकी सोच थी कि बालोद के खिलाड़ी आधुनिक सुविधाओं के बीच अभ्यास करें और प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करें। लेकिन आज स्टेडियम की वर्तमान स्थिति उनके इन सपनों के बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है।

रखरखाव का अभाव और गैर-खेल आयोजनों की मार
वर्तमान में स्टेडियम की हालत अत्यंत दयनीय है:
- क्षतिग्रस्त मैदान: मैदान में जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं और हरी-भरी घास लगभग नष्ट हो चुकी है।
- बुनियादी सुविधाओं का अकाल: पर्याप्त रोशनी (लाइटिंग), स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
- गैर-खेल गतिविधियों का बोलबाला: स्थानीय खिलाड़ियों के अनुसार, यहां खेल गतिविधियों से अधिक सरकारी, सामाजिक और व्यापारिक आयोजन होते हैं। इन आयोजनों के कारण मैदान लगातार क्षतिग्रस्त हो रहा है और खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

‘राष्ट्रीय पर्व पर ही क्यों जगती है प्रशासनिक चेतना?’
स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों का कहना है कि पूरे वर्ष स्टेडियम की स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। जैसे ही 15 अगस्त या 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व आते हैं, प्रशासन अचानक नींद से जागता है और खानापूर्ति के लिए सफाई व मरम्मत में जुट जाता है। कार्यक्रम समाप्त होते ही फिर महीनों तक स्टेडियम को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। लोगों का मानना है कि यदि पूरे वर्ष नियमित रखरखाव किया जाए, तो करोड़ों रुपये की इस खेल संपदा को नष्ट होने से बचाया जा सकता है।
सरदार पटेल मैदान भी उपेक्षा की मिसाल
नगर पालिका कार्यालय के सामने स्थित सरदार पटेल मैदान भी प्रशासन की उदासीनता की कहानी बयां कर रहा है। यहां धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन तो होते हैं और आसपास के स्कूली बच्चे भी खेलते हैं, लेकिन रखरखाव न होने से इसकी स्थिति भी दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। इससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खिलाड़ियों और शहरवासियों की मुख्य मांगें
नगर के खिलाड़ियों और नागरिकों ने प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है:
- केवल खेल गतिविधियों के लिए आरक्षण: सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम का उपयोग प्राथमिकता से केवल खेलों के लिए हो।
- वैकल्पिक स्थल का विकास: गैर-खेल व सांस्कृतिक आयोजनों के लिए शहर में अलग से वैकल्पिक स्थान चिन्हित किया जाए।
- बुनियादी सुधार: मैदान का समतलीकरण, नई घास का रोपण, प्रॉपर रनिंग ट्रैक, हाई-मास्ट लाइट और पेयजल व्यवस्था तत्काल दुरुस्त की जाए।
- वार्षिक रखरखाव नीति: पूरे वर्ष के लिए नियमित रखरखाव और सुरक्षा की स्थाई व्यवस्था बने।
- धरोहर का संरक्षण: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की इस पावन धरोहर को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित किया जाए।
विरासत को बचाने की जिम्मेदारी किसकी?
सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम केवल ईंट-पत्थरों से बना एक ढांचा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की दूरदर्शिता, समाजसेवा और खेलों के प्रति समर्पण की जीवंत मिसाल है। यदि समय रहते इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां केवल किताबों में पढ़ेंगी कि कभी खिलाड़ियों के लिए जमीन दान दी गई थी।
अब देखना यह होगा कि 15 अगस्त का समारोह बीत जाने के बाद प्रशासन इस ऐतिहासिक स्टेडियम की स्थायी सुध लेता है, या फिर यह धरोहर अगले राष्ट्रीय पर्व तक एक बार फिर उपेक्षा के अंधेरे में खो जाएगी?


