बालोद। जिले में सागौन पेड़ों की अवैध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें वन विभाग के ही कुछ अधिकारी संलिप्त पाए गए हैं। आरोप है कि अवैध रूप से काटे गए सागौन की लकड़ी का उपयोग विश्वकर्मा फर्नीचर के माध्यम से कुर्सी और ड्रेसिंग टेबल बनवाने में किया गया। इतना ही नहीं, इन लकड़ियों को ढोने के लिए सरकारी वाहन का भी दुरुपयोग किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा संरक्षण के नाम पर जब्त की गई सागौन लकड़ी को सुरक्षित रखने के बजाय निजी उपयोग में लाया गया। अवैध कटाई से प्राप्त लकड़ी को पहले विभागीय परिसर में रखा गया, इसके बाद उसे फर्नीचर बनाने के लिए बाहर भेजा गया।
सरकारी वाहन से ढुलाई, निजी उपयोग का आरोप
जांच में सामने आया है कि अवैध सागौन लकड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में सरकारी वाहन का इस्तेमाल किया गया। यह कृत्य स्पष्ट रूप से शासकीय नियमों का उल्लंघन है। बताया जा रहा है कि लकड़ी से तैयार फर्नीचर कुछ अधिकारियों के निजी उपयोग के लिए बनाया गया।
जांच में 44 नग सागौन लकड़ी जब्त
मामले की जांच के दौरान 44 नग सागौन लकड़ी, जिसकी मात्रा लगभग 0.057 घनमीटर बताई जा रही है, को जब्त किया गया है। जांच टीम ने विश्वकर्मा फर्नीचर सहित संबंधित ठिकानों का निरीक्षण किया, जहां से फर्नीचर निर्माण से जुड़े साक्ष्य मिले।
उच्च अधिकारियों तक पहुंची रिपोर्ट
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। सूत्रों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है।
वन संरक्षण पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने वन संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षक की भूमिका निभाने वाले अधिकारी ही जब भक्षक बन जाएं, तो जंगलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी—यह बड़ा प्रश्न बनकर सामने आया है।

